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Tuesday, 21 December 2010

Bhoot Pret ke Astitva me Vishwas (भूत-प्रेत के अस्तित्व में विश्वास)

Bhoot Pret ke Astitva me Vishwas
(भूत-प्रेत के अस्तित्व में विश्वास)
किसी को भूत-प्रेत के अस्तित्व में विश्वास हो या न हो, वह भूत-प्रेत के प्रति अपनी रुचि अवश्य ही प्रदर्शित करता है।
यद्यपि भूत-प्रेतों के अधिकांश प्रमाण उपाख्यात्मक होते हैं फिर भी इतिहास गवाह है कि आरम्भ से ही लोगों का भूत-प्रेत में व्यापक रूप से विश्वास रहा है।
भूत-प्रेत की अवधारणा उतनी ही पुरानी है जितना कि स्वयं मनुष्य है। कहा जाता है कि भूत-प्रेत मृतक व्यक्तियों के आभास होते हैं जो कि प्रायः मृतक व्यक्तियों के जैसे ही दृष्टिगत होते हैं।
अनेकों देशों की लोकप्रिय संस्कृतियों में भूत-प्रेतों का मुख्य स्थान है। सभी देशों के संस्कृतियों में भूत-प्रेतों से सम्बंधित लोककथाएँ तथा साहित्य पाई जाती हैं।
एक व्यापक धारणा यह भी है कि भूत-प्रेतों के शरीर धुंधलके तथा वायु से बने होते हैं अर्थात् वे शरीर-विहीन होते हैं।
अधिकतर संस्कृतियों के धार्मिक आख्यानों में भूत-प्रेतों का जिक्र पाया जाता है।
हिन्दू धर्म में "प्रेत योनि", इस्लाम में "जिन्नात" आदि का वर्णन भूत-प्रेतों के अस्तित्व को इंगित करते हैं।
पितृ पक्ष में हिन्दू अपने पितरों को तर्पण करते हैं। इसका अर्थ हुआ कि पितरों का अस्तित्व आत्मा अथवा भूत-प्रेत के रूप में होता है।
गरुड़ पुराण में भूत-प्रेतों के विषय में विस्तृत वर्णन किया गया है।
श्रीमद्भागवत पुराण में भी धुंधकारी के प्रेत बन जाने का वर्णन आता है।

भूत-प्रेत प्रायः उन स्थानों में दृष्टिगत होते हैं जिन स्थानों से मृतक का अपने जीवनकाल में सम्बन्ध रहा होता है।
भूत-प्रेत शब्द का प्रयोग मृतात्माओं के संदर्भ में भी किया जाता है।
मरे हुए जानवरों के भूत के विषय में भी जानकारी मिलती है।
जहाँ भूत-प्रेतों का वास हो उन्हें भुतहा स्थान कहा जाता है।
सन् 2005 में गेलुप आर्गेनाइजेशन के द्वारा किये गये सर्वेक्षण से ज्ञात होता है कि 32% अमरीकी भूत-प्रेतों में विश्वास रखते हैं।
भूत-प्रेतों से सम्बंधित फिल्में तथा टी वी कार्यक्रम भी व्यापक रूप से लोकप्रिय रहे हैं।


 भूत शब्द का प्रयोग मरणोपरान्त किसी प्राणी के अस्तित्व अथवा स्मृतियों को इंगित करने के लिए भी किया जाता है। अंग्रेजी भाषा का शब्द GHOST इसी का पर्याय है। यद्यपि मरनोपरान्त प्राणी का अस्तित्व शेष रहना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नही किया जा सका है, किन्तु अनेकानेक ऐसे उदाहरण भी मिलते रहते हैं जिनसे भूत के इस अर्थ की भी पुष्टि होती है। आत्मा के अस्तित्व के साथ ही भूत के इस अर्थ का अस्तित्व भी जुडा है। थोड़ा गहन रूप में चिन्तन करने पर भूत को “सूक्ष्म शरीर” के समानार्थक रूप में देखा जा सकता है। “सूक्ष्म शरीर” आयुर्वेद के सिद्धान्तों के अनुसार सत्रह तत्वों से मिलकर बना होता है (पंचमहाभूतो से रहित)। इन सत्रह तत्वों में पांच ज्ञानेन्द्रियां, पांच कर्मेन्द्रियां, मन, आत्मा, बुद्धि व पंच तन्मात्राऐं शामिल हैं। पंच महाभूतों से निर्मित स्थूल शरीर से मुक्त होकर यह सूक्ष्म शरीर ही बार बार जन्मता मरता है। मरण और पुनर्जन्म के बीच के काल में यह सूक्ष्म शरीर अवयक्त रूप मे रहता है। यह अव्यक्त रूप ही भूत कहा जाता है

भूत शब्द का सामान्य अर्थ समय के उस हिस्से से है जो बीत चुका है। संस्कृत मूल का यह शब्द सामान्यतः भूतकाल के रूप में प्रयुक्त होता रहा है। इसका अर्थ अंग्रेजी में Past Tense के समान है

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