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Tuesday, 21 December 2010

युवा : डाइटिंग कभी नहीं

युवा : डाइटिंग कभी नहीं
किशोरावस्था में शरीर का हर अंग विकसित होता है, एक स्टेप के बाद यह विकास रुक जाता है, फिर चाहे कितना ही प्रयास करें, विकास नहीं होता। यही उम्र है, जिसमें बालक युवावस्था में प्रवेश के पूर्व अपने शरीर को अंतिम पूर्तियाँ (फिनिशिंग टच) देता है। यह संपूर्ण जीवनकाल में सर्वाधिक तेज वृद्धि की अवधि होती है।

इन वर्षों के दौरान आपको हड्डियों की अधिकतम सुदृढ़ता के लिए अतिरिक्त कैल्शियम चाहिए। डाइटिंग करने से आप उन कैलोरियों तथा पोषक तत्वों से वंचित रह जाते हैं जो समुचित शारीरिक वृद्धि के लिए जरूरी हैं और वास्तव में आपका विकास अवरुद्ध कर सकते हैं।

यह लड़कियों के मासिक धर्म को रोक सकता है और लड़कों की मांसपेशियों का विकास बाधित कर सकता है। स्वस्थ आहार लेना कठिन नहीं है यदि आप भोजन के चुनाव संबंधी कुछ मूलभूत बातें जान लें।


सब्जियाँ, फल, ब्रेड, अनाज, चावल, दूध-दही, चीज, मीट, पोल्ट्री, मछली, सूखी फलियाँ और दालें व मटर, अण्डे और गांठवाले पदार्थ खाने से सभी प्रकार के विटामिन्स, लवण व अन्य पदार्थों की पूर्ति हो जाती है।


आपके पसंदीदा वसायुक्त भोजनों, फलों तथा सब्जियों में संतुलन बनाए रखिए। फल व सब्जियाँ में सामान्यतः वसा तत्व कम होते हैं। आहार के विविध प्रकार ग्रहण कीजिए, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि आपका आहार पोषण की दृष्टि से सही है।

हो सकता है कि आपका वजन अधिक हो और डॉक्टर उसे कम करने की सलाह दे। इसके लिए श्रेष्ठ और प्रभावकारी विधि व्यायाम करना है। वास्तव में, अकसर आपको केवल इसी की जरूरत हो सकती है।यदि डॉक्टर वजन घटाने के लिए आहार घटाने की राय देता है तो वसा तथा शर्करा में कमी कीजिए न कि भोजन की मात्रा में।


* न्यूनतम कैलोरी आहार लेकर वजन कभी कम मत कीजिए विशेषतः यदि आप खिलाड़ी हों।

* तरल पदार्थों के सेवन में कमी मत कीजिए।

* भोजन को टाल देना, विशेषतः नाश्ते को, एक मूर्खतापूर्ण विचार है।

* 'डाइट-पिल्स' पर तो कभी विचार भी मत कीजिए।

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