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Friday, 17 December 2010

Shivling in Science : शिवलिंग खोलेंगे क्लाइमेट चेंज के राज

        पूनम पाण्डे ॥ नई दिल्ली
हिमालय की कंदराओं में छिपा बीस हजार वर्षों का राज अगले तीन वर्षों में खुल सकता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के भू-वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि बीते बीस हजार सालों में हिमालय में किस तरह की भूगर्भीय हलचलें हुई थीं। यह दोनों देशों का जॉइंट प्रोग्राम है। इस स्टडी में बीस हजार वर्षों में हुए क्लाइमेट चेंज के जरिए भविष्य में मौसम में आने वाले बदलावों को भी आसानी से जाना जा सकेगा।

कैसे मदद करेंगे शिवलिंग
     गगनचुंबी हिमालय की चोटियों को वजूद में आने से पहले किन-किन बदलावों से गुजरना पड़ा, यह अभी तक राज है। हिमालय के इतिहास को खंगालने में शिवलिंग वैज्ञानिकों की मदद करेंगे। इस खोज कार्यक्रम से जुड़ीं डॉ. जयश्री ने बताया कि हिमालय की गुफाओं में बने शिवलिंग पूरे इतिहास को खुद मे समेटे हैं। इनके जरिए बीते सालों में हुई कई घटनाओं की अहम जानकारियां मिल सकती हैं। कैल्शियम कार्बोनेट से बने 25 सेंटीमीटर के एक शिवलिंग को बनने में बीस हजार सालों का सफर तय करना पड़ता है। यही नहीं, इस दौरान हुई सभी भूगर्भीय हलचलों के निशान भी इसमें कैद हो जाते हैं।

हिमालय की गुफाओं का अध्ययन
     इस काम में मेलबर्न यूनिवर्सिटी के प्रफेसर माइक सेनीफोर्ट, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु की वैज्ञानिक डॉ. जयश्री और कुमाऊं यूनिवर्सिटी के भूगर्भ शास्त्री प्रो. बी. एस कोटलिया अहम भूमिका निभाएंगे। पहले चरण की शुरुआत कुमाऊं और गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र से की जा रही है। प्रो. सेनीफोर्ट ने बताया कि इस स्टडी के जरिए सालों के इतिहास को सामने लाने की कोशिश की जाएगी। हम यूरेनियम, थोरियम सीरीज के तहत हिमालय की गुफाओं का अध्ययन करेंगे। तीन सालों में कई राज खुलने की उम्मीद है।

भविष्य का अनुमान बनेगा आसान
     यह अध्ययन बीते बीस हजार सालों में आए भूकंपों की भी जानकारी देगा। जिससे भविष्य में आने वाले भूकंपों और उनकी तीव्रता के बारे में पता करना आसान हो सकता है। तीन सालों तक चलने वाले इस अध्ययन में हर साल की प्रोग्रेस रिपोर्ट दोनों देशों की सरकारों की दी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस प्रोजेक्ट के जरिए धरती के कई राज सामने आएंगे।

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